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Showing posts from November, 2023

अद्भुत ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ की कहानी

दोस्तों क्या आप भगवान शिव के वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के स्थापित होने की कहानी जानते हैं यदि नहीं  तो आज का यह ब्लॉग आप ही के लिए है तो बिना देर किए चलते हैं सीधा झारखंड के धार्मिक शहर देवघर की ओर जहां स्थापित है यह अद्भुत ज्योतिर्लिंग। इस ज्योतिर्लिंग के स्थापना की कहानी जुड़ी हुई है लंकापति रावण से रावण भगवान शिव का परम भक्त था। प्रसिद्ध शिव तांडव स्तोत्रम भी रावण द्वारा ही रचित है। कहते हैं कि एक बार लंकापति रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए हिमालय पर घोर तप किया किंतु वह  वह भगवान शिव को प्रसन्न न कर सका जब भगवान ने उसे दर्शन न दिए तब उसने एक एक करके अपने शीश को काटकर आहुति के तौर पर हवन कुंड में डालता गया यह करते करते उसने अपने 9 शीश  काट दिए। जब वह अपना दसवा शीश काटने ही वाला था तभी भगवान शिव ने उसके इस भक्ति भाव और बलिदान से प्रसन्न होकर  दर्शन दिए और उसके सभी दशो सिरों को  लौटा दिया। भगवान ने उसे वरदान मांगने को कहा रावण ने अपनी इच्छा जाहिर की प्रभु आप कामना लिंग के रूप में मेरे साथ लंका चले ताकि मैं वहां आपके शिवलिंग को स्थापित कर सकूं। उसके भगवान को कामना लिं

कहानी ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की

 कहानी ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की ओंकार जिसके अंदर पूरा ब्रह्मांड बसता है जो सर्वप्रथम भगवान शिव के मुख से निकला था इसी कारण भगवान शिव का एक नाम ओमकार भी है। आज हम आपको ले चलेंगे मध्य प्रदेश के खंडवा में स्थित भगवान शिव के एक अद्वितीय ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर के मंदिर में जिस पर्वत पर यह ज्योतिर्लिंग विराजमान है वह पूरा पर्वत ओम के आकार में है जिस कारण इस ज्योतिर्लिंग का नाम ओंकारेश्वर पड़ा। इस पर्वत पर 100 से ज्यादा छोटे – बड़े मंदिर स्थित है। कहते हैं कि हजारों साल पहले भगवान श्री राम के पूर्वज राजा मांधाता ने इस पर्वत पर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया। जिसके फलस्वरूप भगवान शिव ने दर्शन देकर वरदान मांगने को कहा मांधाता ने मोक्ष का वरदान मांगा और भगवान शिव  से प्रार्थना की वे लोगों के कल्याण के लिए इसी पर्वत पर विराजमान हो जाए उनकी प्रार्थना पर भगवान शिव ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में सदा के लिए वही विराजमान हो गए। यह हाथों द्वारा निर्मित नहीं अपितु अवतरित हुई ज्योतिर्लिंग है जो धरती के गर्भ से निकली हुई है संपूर्ण मंदिर चारों तरफ से पानी से घिरा हुआ है एक तरफ नर्मदा बहती है व

अमीर बनने के पाँच सिंद्धांत

 दोस्तों हर व्यक्ति की ख्वाहिश होती है की वह अमीर बने उसके पास भी अथाह धन दौलत हो उसके सारे सपने सच हो जाए लेकिन क्या वास्तव में ऐसा हो पाता है?  सपने तो बहुत लोग देखते हैं लेकिन क्या सच सभी के होते हैं नहीं ना| ऐसा क्यों होता है कुछ लोग तो बेहद अमीर बन जाते हैं तो कुछ केवल अपनी जरूरत ही पूरी करते रह जाते हैं । आज के इस ब्लॉग में हम आपको अमीरों के उन पांच सिद्धांतों के बारे में बताएंगे जिनका पालन करके आप अमीर बनने की राह की ओर अग्रसर हो जाएंगे। तो सिंंद्धांत नं १ कहता है 1. पहले बचाओ फिर निवेश करो -  जब भी हमारे खाते में 1 तारीख को सैलरी क्रेडिट होती है तब हम ना जाने क्या क्या सपने पिरोने लगते हैं।अनाप शनाप खर्च करने लगते हैं और अंत में हमारे पास  कुछ नहीं रह जाता।  बहुत सारे लोग अक्सर यही गलती करते हैं इसी गलती के चलते वह कभी अमीर बन ही नहीं पाते ।पहले बचाओ फिर   निवेश करो का सिद्धांत कहता है की आप की सैलरी आते ही सर्वप्रथम आपको इसका एक हिस्सा अलग कर लेना है जो आपकी बचत कहलाएगा फिर इस बचत को एक ऐसी जगह निवेश करना है जहां आपकी यह बचत आपके लिए संपत्ति निर्माण का कार्य करेंगी। बचत करके क

कहानी श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की

 कहते हैं कि भगवान भोलेनाथ से यदि कोई सच्चे मन से  कुछ मांगता है तो उसे वह अवश्य मिलता है। सभी देवताओं में केवल भगवान शिव ही एक ऐसे देवता है जो जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं बस आवश्यकता है तो केवल श्रद्धाभाव की।  आज आपको इस ब्लॉग में द्वादश ज्योतिर्लिंगो में से एक श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की कहानी के बारे में बताएंगे तो बिना देर किए चलिए चलते हैं सीधा मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में जहां स्थित है हमारे प्रभु भगवान शिव का यह ज्योतिर्लिंग। इस ज्योतिर्लिंग के उद्भव की कहानी भी अद्भुत है कहते हैं कि इस शहर में एक चारों वेदों का प्रकांड विद्वान ब्राह्मण रहता था उसका नाम वेदप्रिय था।  भगवान शिव में उसकी अगाध श्रद्धा थी। भोलेनाथ के आशीर्वाद से उसे चार बेटे हुए जिनका नाम देवप्रिय  संस्कृत प्रियमेधा और सुव्रत था।उस समय राक्षसों का आतंक संपूर्ण धरती पर था राक्षस ब्राह्मणों के यज्ञ कर्म में विघ्न डालते ऋषि मुनियों को सताते यहाँ तक की उन्हें जान से मार डालते थे।  उज्जैन में भी एक ऐसा ही राक्षस था जिसका नाम दुुशण था।  ब्रह्मा के वरदान के कारण उसे युद्ध में कोई नहीं हरा सकता था उसकी विजय सदैव निश्चित

कैसे बनाएं लोगों से अच्छे संबंध

 सर्वप्रथम मेरा आपसे एक प्रश्न है कि अच्छे संबंध बनाना क्यों जरूरी है? चलिए  इसका उत्तर हम देते हैं जब आप सफलता की राह में आगे बढ़ते है तो कई बार आपको मुश्किलों का सामना करना पड़ता है तो कई बार ऐसा होता है कि आपको असफलता हाथ मिलती है आपने जहां से शुरू किया था वही आप दोबारा पहुंच जाते हैं। यह स्थिति बेहद ही निराशाजनक होती है| इस समय आप अपने आप को अकेला महसूस करते हैंं| जीतने की चाह आपके अंदर से खत्म हो जाती है। ऐसी स्थिति में यदि कोई आपका हाथ थाम ले और फिर से खड़ा होने के लिए आपको प्रेरित करे तब आपके अंदर एक नई उमंग जाग जाती है  और आप फिर से मेहनत करने के लिए तैयार हो जाते हैं और एक बार फिर जोखिम उठाते हैं। यदि  आपका उस व्यक्ति के साथ संबंध अच्छा नहीं होता तो शायद ही आप दोबारा उठ पाते। अच्छे संबंध के कारण ही उस व्यक्ति ने आपके बुरे वक्त में  साथ दिया। यदि आपके उस व्यक्ति के साथ अच्छे संबंध नहीं होते तो भला वह क्यों आपके साथ खड़ा होता यह व्यक्ति कोई भी हो सकता है चाहे आपका परिवार हो समाज हो  या कोई अन्य हो।  अब बात करते हैं अच्छे संबंध बनाने के लिए किन किन बातों का हमें सदैव ध्यान रखना च

असीम सफलता पाने के तीन वैज्ञानिक सूत्र

 यह जीवन एक ही बार मिला है और यह भी सफल न हो तो फिर इंसान के जीने का मकसद ही क्या? सफलता के मायने सभी के लिए अलग अलग होते हैं किसी के लिए सफलता का अर्थ है अथाह धन दौलत तो किसी के लिए सफलता का अर्थ है अच्छा जीवन किसी के लिए अच्छी गाड़ी तो किसी के लिए अच्छा घर लेकिन क्या सभी सफल हो पाते हैं?उत्तर है नहीं। ऐसा क्यों होता है कि कुछ लोग तो जीवन में बहुत अधिक सफल हो जाते हैं और कुछ निरंतर संघर्ष करते रहते हैं फिर भी अच्छा जीवन नहीं जी पाते।  नमस्कार आज के इस ब्लॉग में सफलता पाने के तीन वैज्ञानिक सूत्रों से आपको अवगत कराएंगे। जीवन में आप यदि इन तीनों सूत्रों को लागू करेंगे तो मुझे विश्वास है कि आप सही दिशा की ओर चलते चले जाएंगे। आसमान की उन असीम ऊंचाइयो को छूने के लिए निरंतर संघर्ष करना पड़ता है और यही संघर्ष आपको एक दिन मीठे फल प्रदान करता है। इन मीठे फलों को प्राप्त करने में यह तीन सूत्र आप की निश्चित ही सहायता करेंगे- 1. निर्णय लीजिये-  कहते हैं कि आपका निर्णय ही आपके भविष्य निर्माण का कार्य करता है आज आप जो भी है वह भूतकाल में लिए गए निर्णय के कारण है और आप आगे जो बनेंगे वह आज के निर्णय क

कहानी एक अद्भुत ज्योतिर्लिंग मल्लिकार्जुन की

 कहते हैं कि मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से आपकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। क्या आप जानते हैं इस अद्भुत ज्योतिर्लिंग के उद्भव की कहानी?  अगर नहीं तो निराश मत होइए यह ब्लॉग आप ही के लिए है।  तो बिना देर किए चलते हैं अपनी कहानी की ओर- एक बार की बात है श्री गणेश और भगवान कार्तिकेय मैं बहस हो रही थी कि कौन बड़ा है? दरअसल बात यूँ थी कि जो बड़ा है उसका विवाह पहला होगा। वाद विवाद करते करते वे दोनों माता पार्वती और भगवान भोलेनाथ के समक्ष पहुंचे दोनों की बातें सुनकर भगवान शिव ने कहा कि तुम दोनों में कौन बड़ा है इस बात का निर्णय एक शर्त से होगा की जो भी इस धरती की सबसे पहले परिक्रमा करके कैलाश लौटेगा वही बड़ा होगा और उसी का विवाह सबसे पहले होगा इस शर्त सुनकर कार्तिकेय अपने वाहन मयूर पर बैठकर धरती की परिक्रमा करने चल दिए। वहीं दूसरी और भगवान गणेश का वाहन था मूषक अब मूषक चले तो कितना चले इसी बीच गणेश जी को एक युक्ति सूूझी उन्होंने अपने माता-पिता की परिक्रमा लगना शुरू कर दिया। उन्होंने यह क्रम सात बार तक किया। इस घटना से भगवान शिव अत्यंत ही प्रसन्न हुए और गणेश जी का विवाह विश्वरू

कहानी प्रथम ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ की

  श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग जिनके दर्शन मात्र से सारे कष्ट मिट जाते हैं हमारे बाारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। हर साल हजारों भक्तगण मीलों दूर से इनके दर्शन के लिए आते हैं।     आज के इस ब्लॉग में हम सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के उद्भव से जुड़ा एक रोचक किस्सा जानेंगे तो देर किस बात की बने रहिएगा हमारे साथ इस ब्लॉग के अंत तक।  भगवान शिव का यह अद्भुत ज्योतिर्लिंग गुजरात के सौराष्ट्र जिले में स्थित है। कहते हैं की प्रजापति दक्ष की 27 पुत्रियां थी।  उन्होंने अपनी सभी पुत्रियों का विवाह चंद्रमा के साथ कर दिया था।  चंद्रमा अपनी सभी पत्नियों से प्रेम करता था किंतु अथाह प्रेम वह केवल रोहिणी से करता था। सभी पत्नियाँ उनके इस व्यवहार से नाराज थी। वह सभी अपनी समस्या के समाधान हेतु अपने पिता प्रजापति दक्ष के यहां पहुंचती है। प्रजापति दक्ष यह बात सुनकर अत्यंत क्रोधित होते हैं और चंद्रमा को बुलाकर उसे समझाने का प्रयास करते हैं किंतु चंद्रमा को रोहिणी के आगे कुछ सूज ही नहीं रहा था। इस पर अत्यंत क्रोधी प्रजापति दक्ष ने चंद्रमा को छय होने का श्राप दे दिया और कहा की जा तुझे जिस सुंदरता पर घमंड है वह हर दिन तुझसे